मद्रास हाईकोर्ट ने ‘जना नायकन’ सर्टिफिकेशन आदेश रद्द किया, पुनः सुनवाई के निर्देश

चेन्नई: तमिल फिल्म ‘जना नायकन’ को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मंगलवार (27 जनवरी 2026) को उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने उस सिंगल जज के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें CBFC को निर्देश दिया गया था कि वह इस फिल्म को तुरंत सर्टिफिकेशन (U/A प्रमाणपत्र) दे। अब यह मामला फिर से सिंगल बेंच के पास सुनवाई के लिए भेजा गया है, जिसे नई परिस्थितियों के मद्देनज़र फिर से विचार करना होगा।

मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन शामिल थे। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि सिंगल जज ने निर्णय लेते समय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसीलिए उन्होंने सिंगल जज के आदेश को खारिज कर दिया और मामले को फिर से विचार के लिए उतनी ही बेंच के पास भेज दिया।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब KVN प्रोडक्शंस LLP ने ‘जना नायकन’ फिल्म के लिए CBFC से U/A प्रमाणपत्र देने का आवेदन किया था। दिसंबर 2025 में CBFC की जांच समिति ने फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की थी, लेकिन कुछ कट्स के साथ। निर्माता ने आवश्यक कट्स किये और संशोधित फिल्म को बोर्ड के पास फिर से जमा भी किया।
No relief for Jana Nayagan: Madras HC says grant certificate, CBFC set to appeal order
हालाँकि, 5 जनवरी को CBFC ने अचानक फिल्म को “रीवाइजिंग कमेटी” के पास भेज दिया, यह कहते हुए कि एक शिकायत मिली है जिसमें फिल्म के धार्मिक भावनाओं और सशस्त्र बलों के चित्रण को लेकर आपत्ति जताई गई है। इस बदलाव के बाद फिल्म का प्रमाणन प्रभावित हुआ और रिलीज़ की प्रक्रिया रुक गई।

इसके बाद 9 जनवरी को सिंगल जज, न्यायमूर्ति पी. टी. आशा ने निर्माता पक्ष की याचिका स्वीकार करते हुए CBFC को फिल्म को U/A प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया था और कहा था कि बोर्ड अध्यक्ष के पास रीवाइजिंग कमेटी को मामला भेजने का अधिकार नहीं था। लेकिन उसी दिन डिवीजन बेंच ने इस आदेश को रोक दिया और CBFC की अपील को स्वीकार कर लिया।

अब कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि CBFC को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए और याचिका में उठाए गए सवालों पर गहराई से विचार होना आवश्यक है। इसलिए मामला वापस उसी सिंगल जज के पास भेजा गया है ताकि वह फिर से सुनवाई कर उचित निर्णय दे सके

यह विवाद फिल्म के रिलीज़ और प्रमोशन को प्रभावित कर रहा है। ‘जना नायकन’ को पहले 9 जनवरी 2026 (पोंगल उत्सव के अवसर पर) रिलीज़ करने की योजना थी, लेकिन प्रमाणन से जुड़ी अड़चनों के चलते ये सम्भव नहीं हो पाया। फिलहाल फिल्म की रिलीज़ तारीख अनिश्चित बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, निर्माता पक्ष ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने सभी आवश्यक कट्स समय पर कर दिए थे। बावजूद इसके बोर्ड ने पुनः समीक्षा की प्रक्रिया अपनाई, जिससे विवाद गहराया। अब कोर्ट को यह तय करना है कि क्या CBFC की कार्रवाई कानूनी रूप से सही थी या नहीं, और क्या फिल्म को प्रमाणपत्र मिलना चाहिए।

यह मामला भारतीय फिल्म प्रमाणन प्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के महत्व को भी रेखांकित करता है। आने वाले हफ्तों में जब सिंगल बेंच फिर से सुनवाई करेगी, तब संभव है कि फिल्म के प्रमाणन पर अंतिम निर्णय मिल सके और ‘जना नायकन’ दर्शकों के सामने आ सके

Sonia Sagar
Author: Sonia Sagar

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