दिल्ली में हाल के महीनों में लापता लड़कियों के मामलों को लेकर देशभर में चिंता और बहस तेज है। इसी संवेदनशील मुद्दे के बीच यशराज फिल्म्स (YRF) की आने वाली फिल्म ‘मर्दानी 3’ को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। कुछ यूज़र्स और कथित सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि फिल्म की कहानी और प्रचार रणनीति दिल्ली में हुई इन घटनाओं से “प्रेरित” है, और इससे पीड़ितों के दर्द का “व्यावसायिक इस्तेमाल” किया जा रहा है। इन आरोपों के सामने आते ही YRF ने आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा और सभी आरोपों से साफ तौर पर पल्ला झाड़ लिया।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रही पोस्ट्स में दावा किया गया कि ‘मर्दानी 3’ की कहानी दिल्ली में लापता लड़कियों के मामलों से मेल खाती है। कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि फिल्म के टीज़र या कथित लीक जानकारी में दिखाए गए दृश्य वास्तविक घटनाओं की याद दिलाते हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। बावजूद इसके, मामला इतना बढ़ गया कि YRF को सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देनी पड़ी।
यशराज फिल्म्स के एक प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा, “‘मर्दानी 3’ पूरी तरह से एक काल्पनिक कहानी है, जो महिला पुलिस अधिकारी की बहादुरी और अपराध के खिलाफ उसकी लड़ाई को दिखाती है। इसका किसी भी वास्तविक घटना, व्यक्ति या हालिया मामलों से कोई संबंध नहीं है।” प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम काफी समय से चल रहा था और इसका उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना है, न कि किसी त्रासदी का फायदा उठाना।
YRF के बयान में यह भी कहा गया कि ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइज़ी शुरू से ही महिला सुरक्षा और अपराध के खिलाफ सख्त संदेश देती आई है। पहली दो फिल्मों में भी गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाया गया था, लेकिन उन्हें कभी किसी खास घटना से जोड़कर नहीं देखा गया। स्टूडियो का कहना है कि ‘मर्दानी 3’ भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है, जहां कानून व्यवस्था, नैतिक साहस और न्याय की लड़ाई को केंद्र में रखा गया है।
इस पूरे विवाद पर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों ने भी प्रतिक्रिया दी है। एक वरिष्ठ फिल्म समीक्षक का कहना है, “आजकल किसी भी सामाजिक विषय पर बनी फिल्म को तुरंत मौजूदा घटनाओं से जोड़ दिया जाता है। यह जरूरी नहीं कि हर कहानी किसी हालिया मामले पर आधारित हो। जब तक फिल्म रिलीज़ नहीं होती, तब तक ऐसे निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी है।” वहीं, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का मत है कि फिल्मकारों को संवेदनशील मुद्दों पर काम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि किसी भी वर्ग की भावनाएं आहत न हों।
दिल्ली में लापता लड़कियों के मामलों को लेकर पुलिस और प्रशासन पहले ही दबाव में हैं। ऐसे में फिल्म से जुड़ा यह विवाद एक अलग ही बहस को जन्म दे रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि असली मुद्दा यह होना चाहिए कि इन मामलों पर ठोस कार्रवाई हो, न कि किसी फिल्म को निशाना बनाया जाए। सोशल मीडिया पर भी कई यूज़र्स YRF के समर्थन में सामने आए हैं और उन्होंने लिखा है कि ‘मर्दानी’ जैसी फिल्में समाज में जरूरी संवाद शुरू करती हैं।
फिल्म ‘मर्दानी 3’ में एक बार फिर रानी मुखर्जी के मुख्य भूमिका में होने की चर्चा है, हालांकि YRF ने अभी कास्ट और रिलीज़ डेट को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। फ्रेंचाइज़ी की पिछली फिल्मों को दर्शकों और आलोचकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी, खासकर महिला सशक्तिकरण के संदेश के लिए।
फिलहाल, YRF के बयान के बाद विवाद कुछ हद तक थमता नजर आ रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म के आधिकारिक ट्रेलर और रिलीज़ के बाद लोगों की राय किस दिशा में जाती है। एक तरफ जहां निर्माता इसे एक सशक्त सामाजिक संदेश वाली फिल्म बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्ग इसे मौजूदा घटनाओं के संदर्भ में देखने पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो पाएगा कि ‘मर्दानी 3’ अपने कंटेंट से सवालों को शांत कर पाती है या नहीं।









