हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा दोनों देशों के व्यापार विशेषज्ञों ने “ऐतिहासिक ट्रेड डील” बताया है।
ट्रंप ने कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर तक ले जाएगा। विशेष रूप से कोयला निर्यात, टैरिफ कटौती और बाज़ार पहुँच विस्तार को उन्होंने मुख्य आधार बताया।
यह व्यापार समझौता एक अंतरिम (Interim) व्यापार ढांचा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार तनाव को कम करना और दीर्घकालिक समझौते की दिशा में पहला ठोस कदम उठाना है।
🧾 समझौते की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा था। अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाले कई उत्पादों पर उच्च टैरिफ (50% तक) लगा दिए थे, खासकर उन वस्तुओं पर जो अमेरिका को अपने घरेलू बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए गंभीर लगते थे।
इन टैरिफों के परिणामस्वरूप भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान हुआ, जिससे दोनों देशों के व्यापार पर दबाव पड़ा। इसी तनाव को कम करने के लिए दोनों पक्षों ने 2026 के शुरुआत में एक अंतरिम व्यापार फ्रेमवर्क पर सहमति बनाई।

📊 डील के मुख्य बिंदु
✅ 1. टैरिफ कटौती
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अमेरिका ने भारतीय निर्यात वस्तुओं पर अपने टैक्स को लगभग 50% से घटाकर 18% कर दिया है।
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इससे भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, रसायन, मशीनरी, दवाइयाँ और हथियार भाग जैसे उद्योगों को निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है।
✅ 2. भारतीय बाज़ार में अमेरिकी उत्पाद
डील के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क को घटाने या हटाने की बात कही है। इनमें सूखे अन्न, सोयाबीन तेल, वाइन तथा स्पिरिट जैसे कई वस्तु समूह शामिल थे।
हालाँकि, हाल में जारी संशोधित फैक्ट शीट में कुछ दालों को सूची से हटाया गया है और टेक्नोलॉजी कंपनियों पर डिजिटल सेवाओं कर से हटने वाला प्रावधान भी शामिल नहीं है।
✅ 3. $500 बिलियन की खरीद योजना
डील में यह सुझाव दिया गया कि भारत अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से लगभग $500 बिलियन के उत्पाद खरीदेगा। हालांकि, संशोधित दस्तावेज़ में इसे प्रतिबद्धता से बदलकर इरादा (intend) कर दिया गया है, जो व्यापार विशेषज्ञ इसे संतुलन साधने की कोशिश मान रहे हैं।
✅ 4. संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को डील से बाहर रखा है ताकि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा हो सके। वाणिज्य सचिव के अनुसार, इन क्षेत्रों में छूट भारतीय हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
📈 व्यापार और बाज़ार पर तत्काल प्रभाव
शेयर बाजार ने ट्रेड डील की घोषणा के तुरंत बाद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी — सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में मजबूत उछाल देखा गया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे निवेशक भावना में सुधार होगा, क्योंकि अब निर्यात-आधारित कंपनियों को अमेरिकी बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए इंसेंटिव मिलेगा।
🧑🌾 कृषि एवं घरेलू प्रतिक्रिया
हालाँकि व्यापारी वर्ग और बाज़ारों को डील से फायदा दिख रहा है, वहीं कुछ किसान संगठनों ने इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि डील से भारतीय कृषि उत्पाद और स्थानीय बाज़ार प्रभावित हो सकते हैं। कुछ किसान संगठन अमृतसर में विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
किसान नेताओं का कहना है कि अमेरिका के बड़े और सब्सिडी-सक्षम कृषि ढांचे की प्रतिस्पर्धा में भारतीय छोटे किसान पीछे रह सकते हैं।
📌 आगे क्या होगा?
बातचीत के इस अंतरिम ढांचे को अब आधिकारिक, कानूनी समझौते में बदलने पर काम गति से चल रहा है। भारत की वाणिज्य सचिव की घोषणा के अनुसार, दोनों देशों का लक्ष्य है कि यह समझौता मार्च 2026 के अंत तक औपचारिक रूप से साइन कर लिया जाए।
फिर अगले चरण में इस ढांचे को एक पूर्ण, व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) में बदलने की प्रक्रिया चल सकती है, जो दीर्घकालिक व्यापार सहयोग और निवेश को और बढ़ावा देगा।
📌 विश्लेषण: फायदे और जोखिम
✔️ फायदे
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भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाज़ार में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति।
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विदेशी निवेशकों की विश्वास में सुधार।
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सप्लाई चेन में मजबूती: “चाइना+1” रणनीति का समर्थन।
⚠️ जोखिम/चुनौतियाँ
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घरेलू कृषि और संवेदनशील उद्योगों पर दबाव का जोखिम।
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यह डील अभी प्रारंभिक अवस्था में है — पूरा लाभ और कार्यान्वयन अभी लंबी अवधि में निखरेगा।
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संशोधन से दिख रहा है कि दोनों पक्ष संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं — यानी पूरा डील निरंतर परिवर्तनीय है।








