इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: शिक्षा मंत्रालय ने ‘भारत में एआई का दायरा बढ़ाने’ पर किया मंथन

नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अवसर पर “भारत में एआई का दायरा बढ़ाना” विषय पर एक महत्वपूर्ण सत्र का आयोजन किया। इस सत्र का उद्देश्य देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के विस्तार, उसके शैक्षिक उपयोग, नीति-निर्माण, अनुसंधान तथा उद्योग–शिक्षा सहयोग को नई दिशा देना था। कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और स्टार्टअप संस्थापकों ने भाग लिया और एआई के माध्यम से भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

सत्र की शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि एआई केवल एक तकनीकी प्रवृत्ति नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और सामाजिक विकास का आधार बनती जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में एआई का उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, सीखने की प्रक्रिया को व्यक्तिगत बनाने और दूरदराज़ क्षेत्रों तक बेहतर संसाधन पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वक्ताओं ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत डिजिटल शिक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों को विशेष महत्व दिया गया है। इसी क्रम में एआई को विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम में शामिल करने के प्रयास तेज किए गए हैं। कई आईआईटी, एनआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एआई से संबंधित विशेष पाठ्यक्रम और अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि आने वाले समय में एआई साक्षरता को स्कूली स्तर से ही बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

“भारत में एआई का दायरा बढ़ाना” विषय पर चर्चा करते हुए उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत में डेटा की विशाल उपलब्धता, युवा जनसंख्या और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम एआई विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि हेल्थकेयर, कृषि, वित्त, स्मार्ट सिटी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान तेजी से विकसित हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, एआई का उपयोग फसल उत्पादन का अनुमान लगाने, रोगों की पहचान करने, डिजिटल भुगतान में धोखाधड़ी रोकने और छात्रों की सीखने की गति के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराने में किया जा रहा है।

सत्र में एआई के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग पर भी विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई के विस्तार के साथ-साथ डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और एल्गोरिदमिक पक्षपात जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। शिक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि सरकार “जिम्मेदार एआई” (Responsible AI) के सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे तकनीक का उपयोग पारदर्शी, सुरक्षित और समावेशी तरीके से हो सके।

एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू था—कौशल विकास। वक्ताओं ने कहा कि एआई के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित कर रहे हैं, जो छात्रों और पेशेवरों को एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में दक्ष बना सकें। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कोर्सेज के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

सत्र के दौरान स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारत में एआई आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए निवेश और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को अनुसंधान एवं विकास के लिए अनुदान, कर-छूट और इन्क्यूबेशन सहायता प्रदान करनी चाहिए, जिससे नवाचार को गति मिले। साथ ही, उद्योग–शिक्षा सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया गया, ताकि अनुसंधान सीधे व्यावहारिक समाधान में परिवर्तित हो सके।

ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में एआई के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि एआई आधारित डिजिटल टूल्स को स्थानीय भाषाओं में विकसित किया जाए, तो इससे शिक्षा और सरकारी सेवाओं की पहुंच अधिक व्यापक हो सकती है। उदाहरण के लिए, एआई चैटबॉट्स के माध्यम से छात्रों को उनके विषयों से संबंधित सहायता मिल सकती है, वहीं किसानों को मौसम और बाजार से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सकती है।

सत्र के समापन पर शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि “भारत में एआई का दायरा बढ़ाना” केवल तकनीकी विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार एआई अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को प्राथमिकता देती रहेगी। आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक संस्थानों में एआई लैब स्थापित की जाएंगी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के इस सत्र ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत एआई क्रांति में पीछे नहीं रहना चाहता, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। शिक्षा मंत्रालय की पहल से यह उम्मीद जताई जा रही है कि एआई के माध्यम से देश की शिक्षा प्रणाली अधिक आधुनिक, समावेशी और प्रभावी बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीति, नवाचार और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखा जाए, तो एआई भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में ऐतिहासिक योगदान दे सकता है।

Neelam Rajpoot
Author: Neelam Rajpoot

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