झारखंड से दिल्ली के लिए रवाना हुई एक एयर एम्बुलेंस की उड़ान, जो एक गंभीर मरीज की जान बचाने के उद्देश्य से शुरू हुई थी, कुछ ही मिनटों में दर्दनाक हादसे में बदल गई। यह त्रासदी न केवल सात परिवारों के लिए असहनीय दुख लेकर आई, बल्कि देशभर में एयर एम्बुलेंस सेवाओं की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर गई।

उड़ान भरने के लगभग 20 से 25 मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से विमान का संपर्क अचानक टूट गया। रडार से सिग्नल गायब होते ही हड़कंप मच गया। कुछ समय बाद सूचना मिली कि विमान झारखंड के चतरा जिले के एक घने जंगल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। स्थानीय प्रशासन और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि किसी के बचने की कोई संभावना नहीं रही। सभी सातों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उस समय इलाके में मौसम पूरी तरह साफ नहीं था। कुछ रिपोर्टों में खराब मौसम या तूफानी परिस्थितियों का जिक्र किया गया है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर दुर्घटना के कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। विमान ने उड़ान के दौरान मार्ग बदलने का अनुरोध किया था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम, तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि—इनमें से किसी एक या संयुक्त कारण से यह हादसा हुआ हो सकता है।
इस हादसे की सबसे दुखद बात यह रही कि मरीज के परिवार ने उसे दिल्ली ले जाने के लिए बड़ी आर्थिक व्यवस्था की थी। बताया जा रहा है कि एयर एम्बुलेंस का खर्च लाखों रुपये में था। परिवार ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर यह व्यवस्था की थी, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि बेहतर इलाज से उसकी जान बच सकती है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस दुर्घटना ने न सिर्फ एक मरीज की जिंदगी छीन ली, बल्कि उसके साथ चल रहे डॉक्टर, स्टाफ और दोनों पायलटों की भी जान ले ली।
घटना के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञ विमान के मलबे, संचार रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। यदि ब्लैक बॉक्स सुरक्षित मिलता है तो उससे हादसे की असली वजह सामने आ सकती है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और गहन होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इस हादसे ने एक बार फिर एयर एम्बुलेंस सेवाओं की सुरक्षा, रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश में आपातकालीन चिकित्सा परिवहन की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में एयर एम्बुलेंस सेवा कई परिवारों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है। लेकिन अगर इन सेवाओं की सुरक्षा पुख्ता नहीं होगी, तो यह भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
राज्य सरकार ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। स्थानीय प्रशासन ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और परिजनों को सूचना दी। हादसे की खबर मिलते ही पीड़ित परिवारों में कोहराम मच गया। गांव और शहरों में शोक का माहौल छा गया।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के बावजूद जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। जरूरत है कि सुरक्षा मानकों को और सख्ती से लागू किया जाए, विमान की नियमित जांच हो और आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी बेहतर बनाई जाए।
जिंदगी बचाने निकली यह उड़ान जब आखिरी सफर बन गई, तो उसने कई सवाल पीछे छोड़ दिए—क्या मौसम की चेतावनी पर्याप्त थी? क्या तकनीकी जांच में कोई कमी रह गई? या यह एक दुर्भाग्यपूर्ण संयोग था? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच के जरिए सामने आएंगे।
फिलहाल, देश उन सात जिंदगियों के लिए शोक मना रहा है, जो दूसरों की जिंदगी बचाने या बेहतर इलाज की उम्मीद में निकली थीं, लेकिन खुद इस दर्दनाक हादसे का शिकार हो गईं।








