गंगा घाटों से मंदिरों तक भक्ति की गूंज, माघी पूर्णिमा-रविदास जयंती पर काशी में उत्सव

काशी नगरी में माघी पूर्णिमा और संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती के पावन अवसर पर आस्था, भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला। गंगा घाटों से लेकर प्राचीन मंदिरों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भोर से ही हर-हर महादेव और जय गुरुदेव के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा। देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
Maghi Purnima 2026: गंगा घाटों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब

माघी पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कारण तड़के चार बजे से ही दशाश्वमेध, अस्सी, पंचगंगा, मणिकर्णिका और राजघाट सहित प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं। सूर्योदय के साथ ही घाटों पर दीप, अगरबत्ती और मंत्रोच्चार के बीच गंगा स्नान का सिलसिला तेज हो गया। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद दान-पुण्य किया और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व दक्षिणा प्रदान की।

इसी दिन संत रविदास जयंती भी पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। काशी को संत रविदास की कर्मभूमि माना जाता है, इसलिए इस अवसर पर विशेष उत्साह देखने को मिला। रविदास मंदिरों और आश्रमों में भजन-कीर्तन, सत्संग और शोभायात्राओं का आयोजन किया गया। गुरु रविदास के अनुयायियों ने “मन चंगा तो कठौती में गंगा” जैसे उनके प्रसिद्ध संदेशों को दोहराते हुए समता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।

गुरु रविदास जन्मस्थली मंदिर, सीर गोवर्धनपुर में विशेष आयोजन किए गए। यहां देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेका और संत रविदास की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत शबद और भक्ति गीतों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कई स्थानों पर लंगर और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

काशी विश्वनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिर प्रशासन द्वारा सुचारु दर्शन व्यवस्था की गई थी, ताकि भक्त बिना किसी असुविधा के बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकें। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस, पीएसी और एनडीआरएफ की टीमें घाटों और मंदिर परिसरों में तैनात रहीं। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के माध्यम से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी गई।

नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से साफ-सफाई, पेयजल, चिकित्सा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए। घाटों पर अस्थायी शौचालय, मेडिकल कैंप और खोया-पाया केंद्र बनाए गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लिया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त नावों की व्यवस्था भी की गई, ताकि गंगा स्नान के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

माघी पूर्णिमा और रविदास जयंती के संयुक्त आयोजन से काशी की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सहिष्णुता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग पृष्ठभूमि और समुदायों से आए श्रद्धालु एक साथ गंगा स्नान करते और पूजा-अर्चना करते नजर आए। यह दृश्य काशी की उस परंपरा को दर्शाता है, जहां भक्ति और मानवता सर्वोपरि मानी जाती है।

शाम होते-होते घाटों पर गंगा आरती का भव्य आयोजन किया गया। दीपों की रोशनी, शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच गंगा मैया की आरती ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। हजारों दीपों से जगमगाते घाटों का दृश्य अलौकिक प्रतीत हो रहा था। श्रद्धालुओं ने मोबाइल कैमरों में इन पलों को कैद किया और इस आध्यात्मिक अनुभव को अपने जीवन की अमूल्य स्मृति बताया।

कुल मिलाकर माघी पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती पर काशी ने एक बार फिर साबित किया कि यह नगरी केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, समता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक है। गंगा घाटों से मंदिरों तक गूंजी भक्ति की यह गूंज श्रद्धालुओं के मन में लंबे समय तक बनी रहेगी।

Neelam Rajpoot
Author: Neelam Rajpoot

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