विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2026 के लिए एक विशाल वैश्विक स्वास्थ्य आपातकालीन अपील (Global Health Emergency Appeal) लॉन्च की है। इस अपील का उद्देश्य दुनिया भर में स्वास्थ्य आपदाओं, मानवीय संकटों, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे करोड़ों लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
WHO ने कहा है कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्से अभूतपूर्व स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। युद्ध, जलवायु परिवर्तन, महामारी, कुपोषण और कमजोर स्वास्थ्य प्रणालियों के कारण लाखों लोगों की जान जोखिम में है। ऐसे में यह अपील समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।

संकटग्रस्त देशों पर विशेष ध्यान
WHO के अनुसार, अफ्रीका, मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों में स्वास्थ्य सेवाएँ गंभीर दबाव में हैं। संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता के कारण अस्पतालों, दवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी देखी जा रही है। संगठन का कहना है कि 2026 में करोड़ों लोग बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह सकते हैं, यदि समय रहते मदद नहीं पहुंचाई गई।
इस वैश्विक अपील के तहत WHO का लक्ष्य है कि आपातकालीन परिस्थितियों में फंसे लोगों तक टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, संक्रामक रोगों की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और आवश्यक दवाएँ पहुँचाई जाएँ।
महामारी और संक्रामक रोगों से निपटने की तैयारी
WHO ने चेतावनी दी है कि भविष्य में नए संक्रामक रोगों और महामारियों का खतरा बना हुआ है। कोविड-19 जैसी महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत करना कितना ज़रूरी है। 2026 की अपील में महामारी तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया को भी प्राथमिकता दी गई है।
इसके अलावा, मलेरिया, खसरा, हैजा, निपाह वायरस और अन्य संक्रामक बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए निगरानी और रोकथाम कार्यक्रमों को तेज़ करने की योजना बनाई गई है।
मानसिक स्वास्थ्य भी प्राथमिकता
WHO ने यह भी बताया कि युद्ध, विस्थापन और गरीबी के कारण लोगों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। अवसाद, चिंता और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसे मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। 2026 की अपील में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को स्वास्थ्य प्रतिक्रिया का अहम हिस्सा बनाया गया है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियाँ
WHO ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। बाढ़, सूखा, हीटवेव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और स्वास्थ्य ढांचे को भारी नुकसान हो रहा है। संगठन इन क्षेत्रों में जलवायु-सहनीय स्वास्थ्य प्रणालियाँ विकसित करने पर ज़ोर देगा।
वैश्विक सहयोग की अपील
WHO ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, दानदाताओं, सरकारों और निजी संगठनों से इस वैश्विक अपील में सहयोग करने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि बिना सामूहिक प्रयास के वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से निपटना संभव नहीं है।
WHO के महानिदेशक ने कहा,
“स्वास्थ्य एक बुनियादी मानव अधिकार है। 2026 की यह अपील दुनिया के सबसे कमजोर लोगों तक जीवनरक्षक सेवाएँ पहुँचाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
इस अपील के माध्यम से WHO ने यह स्पष्ट किया है कि मानवता की रक्षा के लिए वैश्विक एकजुटता और समय पर कार्रवाई बेहद आवश्यक है।








