BAFTA अवॉर्ड जीतकर ‘Boong’ ने रचा इतिहास

भारतीय सिनेमा के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ, जब मणिपुर की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म Boong ने प्रतिष्ठित BAFTA Awards 2026 में सम्मान हासिल कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया। इस उपलब्धि ने न केवल फिल्म की टीम को गौरवान्वित किया, बल्कि पूरे देश को गर्व का अवसर भी प्रदान किया।

‘बूंग’ की सफलता को भारतीय सिनेमा के लिए एक नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है। यह फिल्म पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, संवेदनाओं और मानवीय रिश्तों को बेहद संवेदनशील और सादगीपूर्ण अंदाज़ में प्रस्तुत करती है। फिल्म की कहानी स्थानीय जीवन, परिवार और समाज के ताने-बाने के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सफल रही।

BAFTA जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में किसी भारतीय क्षेत्रीय फिल्म का सम्मानित होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि अब भारतीय सिनेमा केवल हिंदी या मुख्यधारा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं और विविध संस्कृतियों की कहानियां भी विश्व स्तर पर सराही जा रही हैं।

‘बूंग’ ने अपनी सादगी, गहराई और यथार्थवादी प्रस्तुति के माध्यम से जूरी और दर्शकों का दिल जीता। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी, संगीत और अभिनय की व्यापक रूप से प्रशंसा हो रही है। खासकर मणिपुरी संस्कृति को जिस संवेदनशीलता से दर्शाया गया, वह इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।

फिल्म की इस ऐतिहासिक सफलता पर देश के विभिन्न हिस्सों से शुभकामनाएं और बधाइयां सामने आईं। कई जानी-मानी हस्तियों, कलाकारों और सार्वजनिक व्यक्तित्वों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खुशी जाहिर की। इसे भारतीय सिनेमा की सामूहिक उपलब्धि बताया गया।

यह जीत न केवल फिल्म की टीम के लिए, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए भी गर्व का विषय है। लंबे समय से वहां की कहानियों और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान नहीं मिल पाई थी, जिसकी वे हकदार थीं। ‘बूंग’ की सफलता ने इस कमी को काफी हद तक पूरा किया है।

भारत में क्षेत्रीय सिनेमा लगातार मजबूत हो रहा है। दक्षिण भारतीय फिल्मों के बाद अब पूर्वोत्तर और अन्य क्षेत्रों की फिल्में भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराही जा रही हैं। ‘बूंग’ की जीत इस बात का संकेत है कि अच्छी कहानी और सच्ची भावनाएं भाषा और सीमाओं से परे होती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से युवा फिल्मकारों को प्रेरणा मिलेगी और वे अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों को बड़े मंच तक ले जाने का साहस करेंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक फिल्म समारोहों ने क्षेत्रीय सिनेमा के लिए नए अवसर खोले हैं, जिसका लाभ अब साफ दिखाई दे रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्मों ने कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार समारोहों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। ‘बूंग’ की उपलब्धि इसी क्रम में एक और मजबूत कड़ी के रूप में जुड़ गई है। यह सफलता बताती है कि भारतीय सिनेमा अब विश्व सिनेमा के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।

फिल्म समीक्षकों के अनुसार, ‘बूंग’ की कहानी में मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक संदेश बेहद संतुलित तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। यही कारण है कि यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से भी जुड़ पाई।

मणिपुर सहित देश के कई हिस्सों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह का माहौल है। सोशल मीडिया पर फिल्म के दृश्य, संवाद और टीम की तस्वीरें साझा की जा रही हैं। लोगों का मानना है कि यह केवल एक फिल्म की जीत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और विविधता की जीत है।

‘बूंग’ की सफलता से उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। दर्शकों और फिल्म प्रेमियों को अब ऐसी ही और कहानियों का इंतजार है, जो भारत की विविधता और गहराई को विश्व मंच पर प्रस्तुत करें।

कुल मिलाकर, ‘बूंग’ की BAFTA जीत भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। यह उपलब्धि आने वाले समय में कई नई प्रतिभाओं को प्रेरित करेगी और भारत की सांस्कृतिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर और मजबूती देगी।

Sonia Sagar
Author: Sonia Sagar

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