एनएचआरसी ने एम्स समेत भारत के सभी AIIMS संस्थानों में फैकल्टी की नियुक्तियों और खाली पदों को भरने के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
यह निर्देश आयोग ने एक शिकायत के आधार पर दिया है जिसमें कहा गया कि AIIMS में शिक्षण और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी के कारण लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार व जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) पर विपरीत असर पड़ रहा है।
शिकायत क्या थी?
🔹 एक मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा NHRC में शिकायत दर्ज कराई गई थी जिसमें बताया गया कि:
कई AIIMS संस्थानों में लगभग 40 % फैकल्टी पद अभी भी खाली हैं।
नई और पुराने दोनों तरह के AIIMS में पूरी तरह योग्य शिक्षकों और अनुभवी डॉक्टरों की कमी के चलते चिकित्सा शिक्षा, मरीजों की उपचार गुणवत्ता और शोध कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
नई दिल्ली समेत कई बड़े AIIMS में भी बड़ी संख्या में फैकल्टी नियुक्त नहीं किए गए हैं।
इस कमी से अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता, छात्रों की पढ़ाई तथा मरीजों को विशेषज्ञ सलाह मिलने में देरी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
एनएचआरसी ने संबंधित अधिकारियों (जिनमें स्वास्थ्य मंत्रालय और AIIMS प्रबंधन शामिल हैं) को आठ (8) सप्ताह के भीतर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है, जिसमें शामिल हैं:
खाली फैकल्टी पदों की पहचान करना।
उन पदों पर योग्य और सक्षम उम्मीदवारों की नियुक्ति की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करना।
पूरे भर्ती एवं नियुक्ति के कामकाज की प्रगति के बारे में आयोग को रिपोर्ट देना।
यह निर्देश एक समय सीमा (8 हफ्ते) के साथ दिया गया है ताकि मंत्रालय और संस्थान इस समस्या को त्वरित और प्रभावी ढंग से हल करें।
एनएचआरसी ने इस मामले को इसलिए गंभीरता से लिया क्योंकि:
फैकल्टी की कमी से रोगियों का इलाज प्रभावित हो रहा है।
पालक छात्रों को उचित शिक्षा और विशेषज्ञ शिक्षकों से प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है।
यह स्थिति लोगों के बुनियादी मानव अधिकार, जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार को जोखिम में डालती है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी में सामने आया है कि:
AIIMS में फैकल्टी के लगभग 34-40 % पद अभी भी खाली हैं।
AIIMS नई दिल्ली सहित कई संस्थानों में लंबी अवधि से नियुक्ति प्रक्रिया में देरी है।एम्स दिल्ली में अकेले ही सौ से अधिक फैकल्टी पद खाली बताए गए हैं, जिससे इलाज और अकादमिक कार्यों पर असर पड़ा है।









