राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि रूस और चीन को ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने से रोकने के लिए, उनका डेनमार्क के इस स्वायत्त इलाक़े का अधिग्रहण करना ज़रूरी है.
डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने कहा है, “हमें ग्रीनलैंड की रक्षा करनी होगी. अगर हम ऐसा नहीं करेंगे, तो चीन या रूस करेंगे. मैं उन्हें ग्रीनलैंड में पड़ोसी के रूप में नहीं चाहता, ऐसा कभी नहीं होगा.”
कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि ट्रंप की ग्रीनलैंड संबंधी महत्वाकांक्षाओं (और उन्हें पूरा करने के लिए बल प्रयोग और टैरिफ की धमकियों) का व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग स्वागत कर सकते हैं.
यूरोपियन पॉलिसी सेंटर से जुड़ीं विश्लेषक मारिया मार्टिसियूट कहती हैं, “मुझे लगता है कि रूस और चीन को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा होगा.”
उन्होंने कहा, “यूरोपीय देशों के साथ-साथ नेटो गठबंधन का भी अपने सबसे शक्तिशाली सहयोगी से खतरे में दिखना उन (चीन और रूस) के हित में है. यह रूस और चीन के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि इससे यूक्रेन में रूस की गतिविधियों और ताइवान को लेकर चीन की महत्वाकांक्षाओं को वैधता मिल सकती है.”
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “चीन और रूस को तो खूब मजा आ रहा होगा. सहयोगी देशों के बीच फूट से तो उन्हें ही फ़ायदा होता है.”
लेकिन वास्तविकता थोड़ी अधिक जटिल हो सकती है. बीबीसी के विशेषज्ञ टोनी हान इस बात का विश्लेषण करते हैं कि रूस और चीन वास्तव में ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप के साथ ट्रंप के विवाद को किस नजरिए से देखते हैं.








