टोंक (राजस्थान) — राजस्थान के टोंक जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही विशेष कार्रवाई में पुलिस ने एक बड़ा मुक़ाबला करते हुए ऐसे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिनके खिलाफ 400 से अधिक साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हैं। यह खुलासा डिजिटल अपराधों के बढ़ते आकार और इन अपराधियों की संभवतः राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गिरोह की भूमिका को उजागर करता है।
टोंक जिला स्पेशल टीम (DST) ने आरोपियों रामावतार (26) और हंसराज (28) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक ये दोनों व्यक्ति 22 राज्यों में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े थे और उनका गिरोह लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के जाल में फंसाकर करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने फ़र्ज़ी वेबसाइट, नकली ऑनलाइन लिंक और जालसाज़ी वाले मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर लोगों को ट्रिक किया। इन अभियुक्तों ने विशेष रूप से ऐसी रणनीतियाँ अपनाईं जिनमें लोगों को भ्रामक ऑफ़र और लॉगिन पृष्ठों पर क्लिक करने के लिए भड़का कर उनकी संवेदनशील जानकारी चुराई जाती थी।
जांच में पाया गया कि आरोपियों ने लगभग 82 SIM कार्ड, पांच मोबाइल फोन, एक वाहन और लगभग ₹1 लाख नकद पुलिस की गिरफ्त में आने से पहले ही इस्तेमाल किया था। कथित तौर पर यह वाहन भी अपराध से कमाए गए धन से खरीदा गया था, जिसका उपयोग विभिन्न राज्यों में अपराधी लेनदेन के लिए करते थे।

अपराधियों के खिलाफ नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर कुल 404 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें पीड़ितों द्वारा दर्ज कुल रुपयों की राशि लगभग ₹2.4 करोड़ बताई गई है। इन शिकायतों में लोगों के खाते से धोखाधड़ी से पैसे निकाल लेना, फर्जी लेनदेन, फर्जी निवेश योजनाएँ और नकली प्रलोभन शामिल हैं।
DST के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह ने बैंक खातों के फ़र्ज़ी विवरण को भी उपयोग किया और कई बार पीड़ितों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर पैसे हड़पने का काम किया। पुलिस अब इन खातों और लेनदेन के डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण कर रही है, ताकि साझा नेटवर्क और अन्य भागीदारों को भी चिन्हित किया जा सके।
टोंक के पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश कुमार मीना ने बताया कि यह गिरफ्तारी साइबर अपराधों के खिलाफ चल रही सघन निगरानी और सूचना‑आधारित कार्रवाई का परिणाम है। उन्होंने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे कभी भी अपने OTP, बैंक विवरण या डिजिटल पहचान साझा न करें, और यदि किसी को भी ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बनाया जाता है तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
मीना ने यह भी चेतावनी दी कि साइबर अपराधियों के हाथों में आसानी से अपने निजी डेटा या लिंक भेजना भारी पड़ सकता है, क्योंकि भारी धोखाधड़ी करने वाले गिरोह हर दिन और अधिक तकनीक अपनाते जा रहे हैं।
पुलिस ने जनता को विशेष रूप से यह सलाह दी है कि वे:
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फर्जी वेबसाइट लिंक पर क्लिक न करें।
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अज्ञात स्रोतों से आए टेक्स्ट/ईमेल में साझा जानकारी को सत्यापित करें।
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किसी भी अंजान व्यक्ति को बैंक/OTP/क्रेडेंशियल साझा न करें।
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जो भी संदेहास्पद संदेश, फोन कॉल या फ़ोन रिक्वेस्ट मिले, उसे तुरंत साइबर सेल को रिपोर्ट करें।
पुलिस अभी यह पता लगाने के प्रयास में है कि आरोपियों ने धन को कैसे और कहाँ स्थानांतरित किया, और क्या इनका कोई अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी है। इस गिरोह में और भी सदस्य होने की संभावना जताई जा रही है, जिसके मद्देनज़र आगे बड़ी पूछताछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह पूरा मामला केवल एक स्थानीय गिरफ्तारियों की खबर नहीं, बल्कि एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश है, जिसने हजारों लोगों के जीवन और वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया। पुलिस की सतर्कता ने समय रहते यह बड़ा घोटाला रोका है, पर साथ ही यह घटना साइबर सुरक्षा की जरूरियात को भी रेखांकित करती है।








