नई दिल्ली, 3 मार्च 2026 — पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की हवाई सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। राजधानी स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI) से संचालित होने वाली करीब 80 से 87 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें आज रद्द कर दी गईं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित वे उड़ानें हैं जो मध्य-पूर्व के देशों के लिए निर्धारित थीं। अचानक हुए इस बदलाव से हजारों यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
किन रूट्स पर पड़ा सबसे अधिक असर
एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, दुबई, अबू धाबी, दोहा, कुवैत, रियाद और तेहरान जैसे प्रमुख गंतव्यों के लिए निर्धारित कई उड़ानें या तो रद्द कर दी गईं या अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई हैं। पश्चिम एशिया क्षेत्र के हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) में सुरक्षा चिंताओं और संभावित खतरे को देखते हुए एयरलाइंस ने एहतियाती कदम उठाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग अस्थायी रूप से बंद या सीमित कर दिए गए हैं। इसके कारण न केवल सीधी उड़ानें प्रभावित हुई हैं, बल्कि वे फ्लाइट्स भी प्रभावित हुई हैं जो यूरोप और अफ्रीका के लिए इसी मार्ग का उपयोग करती थीं।
यात्रियों की परेशानी
सुबह से ही IGI एयरपोर्ट पर लंबी कतारें देखी गईं। कई यात्री अपने टिकट की स्थिति जानने और वैकल्पिक उड़ानों की जानकारी लेने के लिए एयरलाइन काउंटरों पर पहुंचे। कुछ यात्रियों ने बताया कि उन्हें अंतिम समय में उड़ान रद्द होने की सूचना मिली, जिससे उनकी यात्रा योजनाएं पूरी तरह प्रभावित हो गईं।
एक यात्री, जो दुबई जाने वाले थे, ने बताया कि उन्हें बोर्डिंग से कुछ घंटे पहले संदेश मिला कि उनकी फ्लाइट रद्द कर दी गई है। उन्होंने कहा कि होटल बुकिंग और बिजनेस मीटिंग्स सब प्रभावित हो गई हैं। इसी तरह कई प्रवासी भारतीय, जो मध्य-पूर्व में काम करते हैं, वे भी अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी का सामना कर रहे हैं।
एयरलाइंस की प्रतिक्रिया
एयरलाइंस कंपनियों ने बयान जारी कर कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उड़ानें रद्द करना आवश्यक कदम था। अधिकांश एयरलाइंस प्रभावित यात्रियों को पूर्ण रिफंड या मुफ्त री-शेड्यूलिंग का विकल्प दे रही हैं।
कुछ एयरलाइंस ने वैकल्पिक मार्गों से उड़ान संचालित करने की संभावना भी तलाशनी शुरू कर दी है, हालांकि इससे यात्रा समय बढ़ सकता है और टिकट की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में और उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं।
एयरपोर्ट प्रशासन की तैयारियां
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है। यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त हेल्प डेस्क लगाए गए हैं और सूचना प्रणाली को अपडेट किया गया है ताकि समय-समय पर फ्लाइट स्टेटस की जानकारी मिलती रहे।
एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या ग्राहक सेवा से जांच लें। इससे अनावश्यक भीड़ और असुविधा से बचा जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। एशिया, यूरोप और अमेरिका के कई देशों की उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने क्षेत्र के ऊपर से गुजरने वाले मार्गों को अस्थायी रूप से बदल दिया है।
वैश्विक विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष का सबसे पहले असर हवाई यातायात पर पड़ता है, क्योंकि सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दी जाती है। एयरस्पेस बंद होने या सीमित होने से उड़ानों का पुनर्निर्धारण जटिल प्रक्रिया बन जाता है।
आर्थिक असर
उड़ानों के रद्द होने से एयरलाइंस को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। ईंधन की लागत, क्रू शेड्यूलिंग और यात्रियों को मुआवजा देना — ये सभी कारक वित्तीय दबाव बढ़ाते हैं। इसके अलावा, ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर पर भी इसका असर पड़ सकता है, खासकर उन यात्रियों पर जो छुट्टियों या व्यापारिक उद्देश्यों से यात्रा कर रहे थे।
ट्रैवल एजेंसियों का कहना है कि मध्य-पूर्व मार्ग भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी वहां कार्यरत हैं। ऐसे में उड़ानों में व्यवधान से आवागमन प्रभावित होना स्वाभाविक है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पूरी तरह पश्चिम एशिया के राजनीतिक और सैन्य हालात पर निर्भर करेगी। यदि तनाव कम होता है और एयरस्पेस सुरक्षित घोषित किया जाता है, तो उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो सकती हैं। हालांकि, फिलहाल यात्रियों को सतर्क रहने और यात्रा योजनाओं में लचीलापन रखने की सलाह दी जा रही है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां हालात पर नजर रखे हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का रद्द होना इस बात का संकेत है कि वैश्विक तनाव का असर कितनी तेजी से आम जनजीवन तक पहुंच सकता है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाए गए ये कदम भले ही असुविधाजनक हों, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जरूरी माने जा रहे हैं।
जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक हवाई सेवाओं में अनिश्चितता बनी रह सकती है। ऐसे में यात्रियों के लिए बेहतर होगा कि वे नियमित रूप से अपडेट लेते रहें और अपनी यात्रा योजनाओं को परिस्थितियों के अनुसार समायोजित करें।






