राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आरोपियों के रिश्तेदार भी जांच के दायरे में, ‘सुप्रीम’ आदेश के बाद एक्शन में SIT

अयोध्या / नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा (दान) चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले में अब जांच की आंच आरोपियों के रिश्तेदारों और करीबियों तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सख्त निर्देशों के बाद पुनर्गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में बड़े पैमाने पर वित्तीय और आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) की जांच शुरू कर दी है।

आईजी किरण एस. (IG Kiran S) के नेतृत्व में गठित नई एसआईटी अब सिर्फ दान गणना कक्ष (Donation Counting Room) तक ही अपनी जांच सीमित नहीं रख रही है, बल्कि चोरी की रकम से जुटाई गई अचल संपत्तियों और बेनामी सौदों की परतें उधेड़ने में जुट गई है।

1. रिश्तेदारों की संपत्तियां और बैंक खाते स्कैनर पर

जांच अधिकारियों के अनुसार, मंदिर निर्माण और दान संग्रह शुरू होने के बाद से गिरफ्तार आरोपियों और उनके रिश्तेदारों के रहन-सहन और जीवनशैली में अचानक आए अप्रत्याशित बदलावों को सबूत के तौर पर जोड़ा जा रहा है।

  • बेनामी जायदाद का शक: पुलिस और एसआईटी की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि साधारण आय वर्ग वाले कुछ मुख्य आरोपियों के परिजनों ने हाल ही में अयोध्या और आसपास के जिलों में अचल संपत्तियां खरीदी हैं।

  • संदिग्ध निर्माण और खरीद: जांच में पाया गया कि आरोपी लवकुश मिश्रा अयोध्या में दो मंजिला मकान का निर्माण करा रहा था। वहीं उसके एक रिश्तेदार अनुकल्प द्वारा हाल ही में अयोध्या क्षेत्र में एक नए मकान की खरीद की बात भी सामने आई है।

  • आसपास के जिलों से मांगा गया ब्योरा: अयोध्या पुलिस और एसआईटी ने पड़ोसी जिलों के राजस्व अधिकारियों से आरोपियों और उनके करीब 50 से अधिक रिश्तेदारों के नाम दर्ज जमीन, मकान और अन्य बेनामी संपत्तियों का पूरा ब्योरा मांगा है।

2. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और SIT का पुनर्गठन

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant), जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान मामले में निष्पक्ष, त्वरित और गुणात्मक जांच (Speedy, Fair and Qualitative Probe) सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर अमल करते हुए जांच टीम को और मजबूत किया।

SIT अधिकारी / पद जिम्मेदारी एवं भूमिका
आईजी किरण एस (IGP Kiran S) टीम के प्रमुख, पूरी जांच का नेतृत्व
डीआईजी सोमेन वर्मा (DIG Somen Barma) रणनीतिक और फील्ड इन्वेस्टिगेशन निगरानी
एसएसपी गौरव ग्रोवर (SSP Gaurav Grover) स्थानीय पुलिस समन्वय एवं साक्ष्य संकलन
एएसपी रितेश कुमार सिंह (Addl SP Ritesh Kumar) केस डायरी और तकनीकी पहलुओं का संचालन
फॉरेंसिक ऑडिटर (Charted Accountant) बैंक ट्रांजैक्शन, वित्तीय ऑडिट और मनी ट्रेल की जांच

3. अब तक क्या-क्या हुआ?

  • 8 गिरफ्तारियां: मामले के उजागर होने के बाद से अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिनकी न्यायिक हिरासत अयोध्या की विशेष अदालत द्वारा बढ़ाई जा चुकी है।

  • सीसीटीवी और फॉरेंसिक सबूत: पहली एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार, दान कक्ष के सीसीटीवी फुटेज में नोट छिपाने और फुटेज से छेड़छाड़ करने के करीब 70 से अधिक ठोस साक्ष्य मिले हैं।

  • पारदर्शिता का भरोसा: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आश्वासन दिया है कि एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान खातों में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के कदम उठाए जाएंगे।

Mohd Osama
Author: Mohd Osama

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