
नई दिल्ली: 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर आयोजित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के छात्र विरोध-प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़पों के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम और क्राइम ब्रांच द्वारा की गई विस्तृत डिजिटल जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन की आड़ में 2,800 से अधिक (2,873) ऐसे लोग शामिल हुए थे, जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास (Criminal Record) रहा है।
पुलिस आयुक्त द्वारा गृह मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट और सार्वजनिक किए गए ब्योरे के अनुसार, प्रदर्शन स्थल और संसद मार्ग के आसपास एडवांस फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों, ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तथा सोशल मीडिया वीडियोज की मदद से इन संदिग्धों की स्कैनिंग की गई थी।
पहचान किए गए संदिग्धों का आपराधिक रिकॉर्ड
दिल्ली पुलिस के डेटाबेस और FRS की मदद से जिन 2,873 व्यक्तियों का मिलान हुआ है, उनमें से 989 लोग जघन्य अपराधों (Heinous Offences) में लिप्त रहे हैं:
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हत्या और प्रयास: 101 आरोपी हत्या (Section 302/103) और 62 आरोपी हत्या के प्रयास के मामलों में नामजद हैं।
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डकैती और लूटपाट: 284 लोग डकैती, चोरी और लूट के मामलों से जुड़े पाए गए हैं।
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महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराध: 61 आरोपी दुष्कर्म, 25 छेड़छाड़ तथा 6 पॉक्सो (POCSO Act) के मामलों में नामजद हैं।
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अन्य गंभीर अपराध: 229 लोग आर्म्स एक्ट, 135 स्नैचिंग तथा 67 एनडीपीएस (NDPS/ड्रग्स) कानून के तहत आरोपी रह चुके हैं।
“छात्रों का आंदोलन भड़काने पहुंचे बाहरी असामाजिक तत्व”
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उपद्रवियों ने जानबूझकर बैरिकेड्स तोड़े और संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था को खतरे में डाला। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भीड़ में शामिल इन आदतन अपराधियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरों, लोहे की छड़ों और बोतलों से हमला किया, जिसके कारण लगभग 250 पुलिस जवान घायल हुए।
“जांच से स्पष्ट होता है कि प्रदर्शन स्थल पर केवल छात्र नहीं थे, बल्कि बड़ी संख्या में आदतन अपराधी और असामाजिक तत्व घुसपैठ कर हिंसा भड़काने की नीयत से आए थे। पुलिस ने अत्यधिक संयम बरतने के बाद ही न्यूनतम आवश्यक बल का प्रयोग किया।”
— दिल्ली पुलिस रिपोर्ट
सीजेपी (CJP) का पलटवार और सुप्रीम कोर्ट का रुख
इस खुलासे के बाद सीजेपी और छात्र संगठनों ने पुलिस के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि प्रशासन शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को बदनाम करने और प्रदर्शनकारियों को डराने के लिए ऐसी सूचियां जारी कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस कार्रवाई (पैलेट गन व लाठीचार्ज) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। सर्वोच्च अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया है कि जिन निर्दोष छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के संकेत दिए हैं।
Delhi Police Identify Protesters With Criminal Records
यह वीडियो दिल्ली पुलिस द्वारा FRS तकनीक के जरिए प्रदर्शन में घुसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान करने के खुलासे और मामले की पूरी कवरेज प्रदान करता है।





