
नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा विभाग में जवाबदेही को लेकर जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए बड़े छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपनी भविष्य की राजनीतिक और सामाजिक रणनीति का खुलासा किया है। आज तक (Aaj Tak) को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे या उनका संगठन निकट भविष्य में किसी भी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे, बल्कि वे एक ‘रिस्पॉन्स ग्रुप’ (Response Group) के रूप में काम करेंगे।
इंटरव्यू के प्रमुख बिंदु और बड़ी बातें
1. कोई राजनीतिक पार्टी जॉइन नहीं करेंगे
अभिजीत दिपके ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया जिनमें उनके किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या स्वयं चुनावी पार्टी में तब्दील होने की बातें कही जा रही थीं। उन्होंने कहा:
“हम कोई भी राजनीतिक पार्टी जॉइन नहीं करेंगे। हम एक ‘रिस्पॉन्स GROUP’ बना रहे हैं, जो आगामी चुनावों तक देश और युवाओं से जुड़े अलग-अलग महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय रहकर काम करेगा और जनता की आवाज़ उठाएगा।”
2. पेपर लीक एंटी-लीक कानून पर सवाल
हाल ही में संसद में पास हुए एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून ‘लीक रोकने’ के लिए नहीं, बल्कि ‘लीक होने के बाद के प्रबंधन’ पर केंद्रित है।
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सरकार ने सजा और जुर्माना तो बढ़ा दिया है, लेकिन प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि पेपर लीक हो ही न।
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पीड़ित छात्र परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे और तय व्यवस्थागत बदलावों पर अभी भी ठोस अमल का इंतजार है।
3. लोकतंत्र और जनांदोलनों पर पक्ष
आंदोलन पर लग रहे राजनीतिक आरोपों का जवाब देते हुए दिपके ने कहा कि इस देश का निर्माण और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली जनांदोलनों के जरिए ही हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र या युवा किसी राजनीतिक दल का मोहरा नहीं हैं और अपनी लड़ाई स्वतंत्र रूप से लड़ना जानते हैं।
4. मीडिया और मुख्यधारा के मुद्दों पर टिप्पणी
इंटरव्यू में दिपके ने यह भी रेखांकित किया कि टीवी स्टूडियोज को विभाजनकारी डिबेट्स छोड़कर ज़मीनी स्तर पर छात्रों, रोजगार, शिक्षा और आम जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर बात करनी चाहिए।
पृष्ठभूमि: क्या है CJP आंदोलन?
मई 2026 में सोशल मीडिया से व्यंग्यात्मक रूप से शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन देखते ही देखते भारत के युवाओं और छात्रों का एक विशाल मंच बन गया। नीट परीक्षा गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए इस आंदोलन के व्यापक दबाव के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2026 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे युवाओं की एक बड़ी जीत के रूप में देखा गया।
इस विषय पर अधिक जानकारी और जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिए गए बयानों को देखने के लिए CJP संस्थापक अभिजीत दिपके की बातचीत देख सकते हैं, जिसमें उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम और अपनी भावी मांगों पर विस्तार से चर्चा की है।





