
नई दिल्ली: देश भर में लागू किए गए 20 प्रतिशत एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) नीति को लेकर जारी घमासान के बीच सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के अंतर पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं। आज तक (Aaj Tak) की विशेष विश्लेषण रिपोर्ट ‘E20 पेट्रोल : सरकारी दावों में सच्चाई का माइलेज कम, बाजीगरी का धुआं ज्यादा’ के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकार और सत्तारूढ़ दल द्वारा किए जा रहे दावे आंकड़ों और तकनीकी तर्कों की कसौटी पर भ्रामक नजर आ रहे हैं।
विश्लेषण के मुख्य बिंदु और बड़े सवाल
1. माइलेज में गिरावट पर आधिकारिक मुहर
जहाँ एक तरफ सरकार और उसके समर्थक E20 पेट्रोल की खूबियाँ गिनाने में लगे थे, वहीं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह स्वीकार किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) 2% से 6% तक घट सकती है।
2. ऑक्टेन नंबर (RON 95) और ‘आंकड़ों का धुआं’
सरकार की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि E20 पेट्रोल में ऑक्टेन नंबर बढ़ा (कम से कम 95 RON निर्धारित) दिया गया है, जिससे इंजन का परफॉर्मेंस बेहतर होगा। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि:
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एथेनॉल का स्वाभाविक ऑक्टेन रेटिंग अधिक (लगभग 108) होता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि इससे वाहन चालकों का माइलेज बढ़ जाएगा।
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एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा घनत्व (Calorific Value) कम होता है, जिससे प्रति लीटर माइलेज में गिरावट आना तय है।
3. पुरानी गाड़ियों और विकल्पों की अनदेखी
रिपोर्ट में इस बात पर गहरा असंतोष जताया गया है कि बाजार में E5 या E10 जैसे कम ब्लेंड वाले पेट्रोल का कोई विकल्प उपभोक्ताओं के पास नहीं छोड़ा गया है। BS-III और BS-IV जैसी पुरानी गाड़ियों के रबर पार्ट्स और इंजन पर इसके नकारात्मक असर की आशंकाएं बनी हुई हैं।
4. आर्थिक बचत का बोझ आम उपभोक्ता पर
आयातित कच्चे तेल की निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने का सरकारी लक्ष्य अपनी जगह है, लेकिन इसका सीधा आर्थिक नुकसान (कम माइलेज के रूप में) आम वाहन चालकों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन खरीदना पड़ रहा है।
निष्कर्ष
रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि पर्यावरण संरक्षण और आयात घटाने की नीतियाँ स्वागत योग्य हो सकती हैं, लेकिन सरकारी प्रचार में माइलेज की कमी और पुरानी गाड़ियों की समस्याओं को छिपाने की कोशिश से उपभोक्ताओं का भरोसा प्रभावित हो रहा है।
E20 पेट्रोल मानक, 95 ऑक्टेन रेटिंग और वाहनों की दक्षता पर इसके प्रभाव को विस्तार से समझने के लिए ET Now की E20 पेट्रोल नीति रिपोर्ट देखें, जिसमें पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और ईंधन दक्षता पर पड़े प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।





